नई सहकारी समितियां जो निर्माण कार्य करती हैं, उन्हें 15% की कम कर दर का लाभ मिलेगा, जो नई निर्माण कंपनियों को मिलता है। यह जानकारी गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने संसद में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
आयकर अधिनियम की धारा 269ST का प्रावधान:
आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अनुसार, किसी भी व्यक्ति से ₹2 लाख से अधिक की नकद राशि प्राप्त करना प्रतिबंधित है। यह प्रावधान किसी एक लेनदेन या किसी “एकल घटना” के लिए एक दिन में किए गए लेनदेन पर लागू होता है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना और जांच का सामना करना पड़ सकता है।
दुग्ध सहकारी समितियों को मिली छूट:
शाह ने राज्यसभा में बताया कि देश की दुग्ध सहकारी समितियां, जो भारत के विशाल डेयरी क्षेत्र की रीढ़ हैं, अब ₹2 लाख से अधिक नकद राशि बैंक अवकाश के दौरान दूध की कीमत के भुगतान के लिए प्राप्त कर सकती हैं। इस छूट से दुग्ध सहकारी समितियों को ग्रामीण और किसान समुदायों को बैंक अवकाश के दिनों में बिना किसी आयकर दंड के भुगतान करने में सुविधा होगी।
ऋण से जुड़ी छूट:
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269SS के तहत, ₹20,000 से अधिक नकद ऋण या जमा अग्रिम की अनुमति नहीं है। इसका उल्लंघन करने पर जमा या ऋण राशि के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है।
शाह ने बताया कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के लिए नकद ऋण या जमा पर यह जुर्माना अब तब नहीं लगाया जाएगा जब “ऐसे ऋण या जमा की राशि, जिसमें उनका बकाया बैलेंस भी शामिल है, ₹2 लाख से कम हो।” पहले यह सीमा प्रति सदस्य ₹20,000 थी।
सहकारी क्षेत्र का महत्व:
सहकारी समितियां जमीनी स्तर पर काम करने वाले ऐसे व्यावसायिक संगठन हैं, जो उनके सदस्यों के स्वामित्व में होते हैं। इनका लाभ और हानि सभी सदस्य समान रूप से साझा करते हैं। भारत का सहकारी क्षेत्र 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है और यह मुख्यतः डेयरी, मत्स्य पालन, वित्त, आवास और कृषि जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों, विशेष रूप से महिलाओं, को आजीविका प्रदान करता है।
देश की सबसे बड़ी डेयरी ब्रांड अमूल और सबसे बड़ी उर्वरक कंपनी इफको सहकारी मॉडल पर आधारित हैं। इसके अलावा, सहकारी आधारित शहरी और ग्रामीण बैंकों का भी देश में बड़ा नेटवर्क है।